धोखेबाज दोस्त

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रामपुर गाँव की गलियों में शाम का वक़्त था। सूरज पहाड़ों के पीछे छिप रहा था और आसमान में नारंगी और लाल रंग की लकीरें बन रही थीं। गाँव के बीचोंबीच एक पुरानी पीपल की छाँव में दो दोस्त बैठे थे। एक का नाम था मोहन और दूसरे का नाम था सोहन।मोहन गाँव का सबसे ईमानदार लड़का माना जाता था। उसके बापू जी की छोटी सी दुकान थी जहाँ गाँव वाले रोज़मर्रा की चीज़ें खरीदते थे। मोहन रोज़ सुबह उठकर दुकान साफ़ करता, सामान व्यवस्थित रखता और ग्राहकों से इतनी मुस्कुराहट से बात करता कि लोग खाली हाथ भी उसकी