रामायण - वेदांत 2.0 Life

  राम दुःखी नहीं थे, हमारी दृष्टि दुःखी है   रामायण - वेदांत 2.0  Life   दृष्टिर्बन्धनकारिणी, दृष्टिरेव विमोचिनी।यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः, यथा चेतना तथा गतिः॥     लोग कहते हैं कि राम ने बहुत दुःख सहा—राजतिलक छूटा, वनवास मिला, पत्नी का हरण हुआ, भाई का वियोग सहा और अंत में भीषण युद्ध लड़ा। सुनकर लगता है कि इससे बड़ा दुःख क्या होगा। परंतु सत्य यह है कि राम दुःखी नहीं थे, दुःखी हमारी दृष्टि है।हम घटना को देखते हैं, राम चेतना में जीते थे। और दुःख का आकार घटना से नहीं, चेतना की ऊँचाई से तय होता है। १. कर्म