मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है। सूत्र: एकोनशतं मार्गा बोधस्त्वेकः।मन्थनाद् विवेकः विवेकाद् बोधः।बोधे सर्वे मार्गाः कृतार्थतां यान्ति॥ परिचय - वेदांत 2.0 धार्मिक और आध्यात्मिक बहुलता को स्वीकार करते हुए अनुभव-केंद्रित सत्य-खोज का नाम है। यह मानता है कि मानवीय परम्पराओं की अनंत विविधता — प्रतीकात्मक '99' — केवल मार्ग सुझा सकती है, अंतिम सत्य नहीं। अंतिम प्रमाण ग्रंथ या परम्परा नहीं, बल्कि विवेक, मंथन और प्रत्यक्ष अनुभव से उपजा 'एक' बोध है। यह निबन्ध उसी दर्शन, उसके तर्क और जीवन में उसके प्रयोग का परिचय है। निबन्ध - वेदांत 2.0 : 99 के मंथन से 1