तुम मेरी आख़िरी दुआ

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️ लेखिका: Zeenat Taufeeqसुबह के आठ बजे थे। सूरज की हल्की सुनहरी किरणें शहर की ऊँची इमारतों के बीच से निकलकर सड़कों पर बिखर रही थीं। हवा में हल्की-सी ठंडक थी, जैसे रात ने जाते-जाते अपनी आख़िरी साँसें इस सुबह को सौंप दी हों। सड़क पर लोगों की भीड़ थी। हर कोई अपनी मंज़िल तक जल्दी पहुँचने की कोशिश में था।उसी भीड़ के बीच एक लड़की खड़ी थी, जिसके चेहरे की मुस्कान सुबह की रोशनी से भी ज़्यादा चमक रही थी।उसका नाम था महक।महक की आदत थी कि वह हर छोटी-सी बात में खुशी ढूँढ़ लेती थी। किसी बच्चे को