महज आठ साल का ही तो था मैं, जब मैंने अपने खेत जाते समय अपनी दादी से पूछा था—"ये पहाड़ कैसे बनते हैं?"दादी मुझे बचपन से ही ढेर सारी कहानियाँ सुनाया करती थीं। उनकी कहानियों में शेर, चीते, हिरन, घोड़े और भी बहुत सारे पात्र हुआ करते थे। उस उम्र में मेरे ज्ञान का मुख्य स्रोत मानो मेरी दादी की कहानियाँ ही थीं, और दादी मेरी हर समस्या की समाधानकर्ता। तो जब-जब मेरे मन में कोई भी प्रश्न आता, मैं अपनी सलाहकार दादी से पूछ लेता था।पहाड़ों के बारे में मेरी जिज्ञासा की वजह यह भी थी कि मेरा जन्म