खोटा सिक्का - 5

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खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृष्टि डाली। सामने चौधरी चाचा, सतीश ओझा, कमरुद्दीन मियाँ, सपन मिश्रा, सुनील झा और गाँव के अन्य बुज़ुर्ग बैठे थे। थोड़ी दूरी पर युवक पंक्तिबद्ध बैठे थे, जबकि बरगद की छाया से कुछ हटकर माताएँ और बहनें उत्सुकता से सभा की ओर निहार रही थीं। वातावरण में ऐसा सन्नाटा था मानो पूरा गाँव किसी सत्य की प्रतीक्षा कर रहा हो।शिबू ने दोनों हाथ जोड़कर सबको प्रणाम किया और शांत किंतु दृढ़ स्वर में बोला—"मेरे पितृतुल्य ग्राम के वरिष्ठजन, मेरी माताओं, बहनों, भाइयों और प्रिय मित्रों!मैं