एक आम सी प्रेम कहानी - 4

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एक आम सी प्रेम कहानी भाग-४लेखिका "अनामिका"भाग-४: सड़क का दो किनारा°लड़के का नज़रिया (मलय-कॉलेज सेकंड ईयर)​उसी बस स्टॉप के दूसरे किनारे पर आज वो फिर दिखी—स्कूल यूनिफॉर्म में, कंधे पर बस्ता टांगे। मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक हल्की सी शरारती मुस्कान आ गई, जैसे कह रही हो कि बुकस्टोर में मेरे 'बच्ची' बोलने पर वह अब और नाराज़ नहीं है। मेरा मन हुआ कि पास जाकर दोबारा उसे थोड़ा चिढ़ाऊँ, पर तभी मेरी बस आ गई। वक़्त की पाबंदी ने हमें रोक दिया।​मैं बेमन से बस में चढ़कर खिड़की वाली सीट पर बैठ गया। जैसे ही बस आगे बढ़ी,