की पकड़ ढीली हो रही थी और पेड़ की जड़ें मिट्टी छोड़ रही थीं। अवनि ने तय कर लिया कि वह उसे ऐसे मरने नहीं देगी।मौत से मुकाबलाअवनि ने हिम्मत जुटाई और ढलान के रास्ते धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी। पत्थरों की रगड से उसके हाथ-पाँव छिल रहे थे, वह फिसल रही थी, पर उसकी नज़र सिर्फ आर्यमन पर थी।फिसलते हुए वह एक ऐसी चट्टान पर पहुँच गई जो आर्यमन के ठीक ऊपर थी। वह उसके बिल्कुल करीब तो नहीं थी, पर इतनी पास थी कि उसकी आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।"आर्यमन जी, घबराइए मत! मैं आ गई हूँ। मैं