वो आखिरी मुलाकातट्रेन को प्लेटफॉर्म पर आने में अभी थोड़ा समय था। हम दोनों साथ बैठे थे, लेकिन उस खामोशी में भी बहुत कुछ कहा जा रहा था। मैं सामने खड़े लोगों को, आती-जाती ट्रेनों को और प्लेटफॉर्म की भीड़ को देखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बार-बार मेरी आँखें आँसुओं से भर जातीं। सब कुछ धुंधला दिखाई देने लगता था।ऐसा लग रहा था जैसे मेरी आँखों के सामने पूरी दुनिया थी, लेकिन मैं सिर्फ उसे देख पा रही थी। हम दोनों के आँसू एक-दूसरे से बातें कर रहे थे। जुबान खामोश थी, लेकिन दिल सब कुछ कह रहे