मैंने अपनी बेटी को स्कूल से लेने जाना था। रास्ते में एक औरत मिली। उसने मुझे रोका। बोली, "बहन, थोड़ा पानी मिलेगा?" मैंने अपनी बोतल उसे दी। वो पानी पीते हुए रोने लगी। मैंने पूछा, "क्या हुआ बहन?" तो बोली, "कुछ नहीं। बस ऐसे ही।"उसकी आँखों में वो रोना था जो बहुत दिनों से भरा हुआ था। जैसे कोई नदी बरसात के बाद उफान पर हो और किनारे तोड़कर बहने को बेताब हो। मैंने उसका हाथ पकड़ा। बोली, "आओ, थोड़ा बैठो। मेरी बेटी का स्कूल अभी छूटने में आधा घंटा है।"हम सड़क किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ