अभय दान

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यजुर्वेद सूक्ति (6) की व्याख्या"मा अघशंसः°यजुर्वेद-- 1/1हे ईश्वर! दुष्ट मेरा अहगत न करें। पूरा मंत्र अर्थ सहितआपके द्वारा उद्धृत "मा अघशंसः" वास्तव में यजुर्वेद 1.1 का एक अंश है। पूरा मंत्र इस प्रकार है—इषे त्वा ऊर्जे त्वा। वायवः स्थ। देवो वः सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणे। आप्यायध्वमघ्न्या देवभागमूर्जस्वतीः पयस्वतीः। प्रजावतीरनमीवा अयक्ष्मा। मा वः स्तेन ईशत। मा अघशंसः। ध्रुवा अस्मिन् गोपतौ स्यात। बह्वीः यजमानस्य पशून् पाहि॥— यजुर्वेद 1.1शब्दार्थमा = नवः = तुमको / तुम्हारास्तेनः = चोरईशत = अधिकार करे, वश में करेअघशंसः = दुष्ट, अनिष्ट चाहने वाला, पापीगोपतौ = रक्षक, स्वामीपशून् पाहि = पशुओं की रक्षा करोभावार्थहे परमात्मा! हमें अन्न और बल