कोटड़ा गाँव की सुबह हमेशा से ही अलग रही थी। यहाँ सूरज उगने से पहले ही महिलाएँ चूल्हे की आग जला चुकी होती थीं और पुरुष अपनी हुक्के की लय में गाँव की चौपाल की ओर बढ़ रहे होते थे। लेकिन उस ठंडी नवंबर की सुबह कुछ और ही होने वाला था। सोलह साल की मीरा ने अपनी झोंपड़ी की दरार से बाहर देखा। आसमान अब भी तारों से भरा था लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। आज उसका दसवीं का रिज़ल्ट आने वाला था और उसे पूरा यकीन था कि वह गाँव की पहली लड़की बनेगी