पीपल के पत्ते

बारिश  की वह पहली बूँद जब पीपल के पत्ते पर गिरी तो वरुण मिश्रा ठीक उसी पल गाँव की सीमा पर खड़ा था। उसके कंधे पर एक भारी बैग था जिसमें तीन कैमरे पाँच लेंस और एक ज़िंदगी भर की थकान बंधी हुई थी। दिल्ली से निकलते समय उसने सोचा था कि यह सिर्फ़ एक और असाइनमेंट है। एक फोटो एसे जो किसी पत्रिका के लिए होगा और फिर अख़बारों में कहीं गुम हो जाएगा। लेकिन जब उसने वह हरा भरा गाँव देखा जहाँ पहाड़ी नदी की आवाज़ हवा में घुल रही थी तो उसे लगा जैसे वह किसी पुराने