मैंने उत्सुकता से उनकी ओर देखा। "आज के बाद तुम जो भी देखोगे, सुनोगे या जानोगे... वह इस कमरे से बाहर नहीं जाना चाहिए। कई बार तुम्हें ऐसे फ़ैसले पता होंगे, जिनकी जानकारी कंपनी के बड़े-बड़े अधिकारियों को भी नहीं होगी। कई बार तुम्हें मेरे परिवार की सुरक्षा, मेरी यात्राओं और मेरे निजी जीवन से जुड़े मामलों में भी साथ रहना पड़ेगा।" उन्होंने कुछ पल रुककर कहा, "क्या तुम यह ज़िम्मेदारी निभा पाओगे?" मैं बिना एक पल गँवाए अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया। "सर... मैं वादा तो नहीं कर सकता कि मुझसे कभी कोई ग़लती नहीं होगी। क्योंकि मैं