Money Vs Me - Part 15

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मैं बिना एक पल गँवाए बोला, "सर, मैंने अब तक जितना खोया है, उसके बाद डरना लगभग छोड़ दिया है। अब अगर मौका मिलेगा, तो अपनी पूरी जान लगा दूँगा।" मेरी बात सुनकर ठाकुर साहब के चेहरे पर संतोष की हल्की-सी मुस्कान उभर आई। उन्होंने मेज़ पर रखी घंटी बजाई। कुछ ही क्षणों में उनका निजी सहायक कमरे के अंदर आया। "मिस्टर शर्मा," ठाकुर साहब ने कहा, "वह अपॉइंटमेंट लेटर लेकर आइए... जिसके बारे में मैंने कल बात की थी।" 'अपॉइंटमेंट लेटर'... ये दो शब्द मेरे कानों में गूँजने लगे। मुझे यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि जो मैं