यहाँ तक मेरी कहानी सुनकर शायद आपको भी यही लग रहा होगा कि अब तक तो मुझे हिम्मत हार देनी चाहिए थी। लेकिन ज़रा सोचिए... क्या जो मैं चाहता था, वह सचमुच इतना गलत था? अगर नहीं, तो फिर आखिर मेरी किस्मत बार-बार मेरा साथ क्यों छोड़ रही थी? पहले मीरा... और फिर ठाकुर उदय प्रताप सिंह। ये दोनों मेरी ज़िंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आए थे। लगा था कि अब शायद ज़िंदगी की दिशा बदल जाएगी। लेकिन जितनी तेज़ी से वे मेरी ज़िंदगी में आए, उससे भी ज़्यादा तेज़ी से डूबते सूरज की तरह ओझल हो गए और