अन्तर्निहित - 53

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[53]सारा के साथ शैल निकल पडा गुरु जी के आश्रम को जाने के लिए। मार्ग में ही सूर्यास्त हो गया तो एक स्थान पर दोनों रुक गए। “इस मार्ग पर पूर्व में भी हम यहीं रात्री निवास कर चुके हैं। आज भी यहीं करना होगा।”“हाँ। आश्रम अभी भी दूरी पर है अंधेरा भी हो गया है।”“आज हमारे पास वाहन है, आप उसके भीतर सो जाइए।”“और तुम?” शैल ने कोई उत्तर नहीं दिया। नदी में डूब रहे सूर्य को देखता रहा। प्रात: काल होते ही निकल पड़े, आश्रम वाले स्थान पर जा पहुंचे। “यहीं था न वह आश्रम, सारा जी?”“हाँ, था तो यहीं किन्तु