कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 3

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अब आपको पता ही होगा कि दृष्टि के पिता मोहनलाल को उसकी पढ़ाई और उनके झुठ के बारे में पता चल गया था। दृष्टि के पिता एक गुस्से वाले होंने के साथ ही बहुत चालाक है। उन्हें पता है कि जबरदस्ती करने से एक दिन दो दिन वो उनकी बात मानेगी पर उनसे जुठ बोलकर अपनी इच्छा का ही करेगी ।" हर पुरुष को यही लगता है कि स्त्री को अपने निर्णय लेने का कोई हक नहीं होता उसको सिर्फ पुरुषो इच्छा अनुसार ही चलना होता है।"इसलिए उन्होंने पहले तो बड़ी आसानी से उन्हें समझाया और उसकी एक गन्दी योजना