किघकन्या - 6

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अंधेरी रात थी ... सब ओर नीरवता छाई थी ... रात के अशुभ पक्षी चीत्कार कर रहे थे ... गीदड़ - कुत्ते अपने - अपने कर्कश स्वर में अशुभ का आभास कराते हुए चीख़ रहे थे। ऐसे डरावने माहौल में हवेली के पीछे बना एक छोटा सा दरवाजा धीरे से खुला, एक साये ने पैर दबा के हवेली में प्रवेश किया । यह घुॅंघरू थी - हवेली की मुख्य महराजिन की बेटी । किस्मत ने इसके साथ अजीब खेल खेला था, बाल विवाह के बाद गौना से पहले ही बेवा होने का कलंक उसके माथे पर लग गया था। बेवा