Muhabbat Ek Sabaq - 19

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उसे पटरी से उतरते देख कर उसने मुस्कुराते हुए उसी के लहजे में जवाब दिया था। "क़सम से बहुत ही अनरोमांटिक हो तुम यार " … .. ….वह अपनी बात का इस क़दर रूखा फीका जवाब पा कर बहुत ही बदमज़ा हो गया था। "नही तो क्या फूल बिछाउं तुम्हारे क़दमों में" … .. .. ??? उस ने खिलखिला कर पूछा। "बिछाने तो चाहिये आखिर को तुम्हारा शौहर ए नामदार जो हूं" …. . ..उसने फर्ज़ी कॉलर अकड़ाए। "शौहर ए नामदार तो नही शौहर ए नामुराद ज़रूर लग रहे हो इस वक़्त बिल्कुल" …. . ….उसने बात को एक बार फिर हवा में उड़ा दिया। "अच्छा