बस अपनी रफ़्तार से लखनऊ की सड़कों पर दौड़ रही थी। खिड़की से आती ठंडी हवा पूरे माहौल को सुकून दे रही थी।सनाया के दूसरी सीट पर चले जाने के बाद अर्जुन फिर से खिड़की के बाहर देखने लगा। लेकिन कुछ ही पल बाद उसे महसूस हुआ कि कोई उसकी तरफ़ बढ़ रहा है।उसने सिर घुमाया।सामने आयत खड़ी थी।उसके चेहरे पर हल्की-सी झिझक थी, जैसे कुछ कहना चाहती हो लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही हो।अर्जुन मुस्कुराया।"जी... कुछ कहना था?"आयत ने धीरे से कहा,"वो... अगर आपको बुरा न लगे तो... मैं दो मिनट यहाँ बैठ सकती हूँ?"अर्जुन ने बगल वाली