भोर की प्रार्थना समाप्त होते ही शिबू बिना किसी को कुछ बताए मठ से निकल पड़ा। पूर्व दिशा में उगते सूर्य की सुनहरी किरणें धरती पर बिखर रही थीं। पक्षियों का मधुर कलरव वातावरण को पवित्र बना रहा था।चलते-चलते वह पास के एक बड़े गाँव में पहुँच गया। सड़क पर बच्चों से भरी निजी विद्यालयों की बसें दौड़ रही थीं। मंदिरों के लाउडस्पीकरों से भक्ति के नाम पर फिल्मी धुनों पर आधारित गीत गूँज रहे थे। शिबू कुछ क्षण रुक गया। उसके चेहरे पर आश्चर्य और चिंता दोनों के भाव थे।वह चौराहे की एक चाय की दुकान पर बैठ गया।चाय