कर्मजली कोख... - 5 (अंतिम भाग)

  • 1.6k
  • 495

आज घर में अफरा-तफरी का माहौल था।साजिया के फैसले से कोई खुश नहीं था।सास नाराज़ थी, नंद ताने दे रही थी,और आसिफ बेचैन होकर बार-बार एक ही बात पूछ रहा था —“तुम पागल हो गई हो क्या?”लेकिन इस बारसाजिया का फैसला अडिग था।वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाती हुईअपने हाथों में बच्चे को संभालेरेशमा के कमरे की तरफ बढ़ने लगी।कमरे के अंदररेशमा अपने फर वाले गुड्डे को थपकियाँ देकर सुला रही थी।कोई और औरत होतीतो शायद अब तक मर चुकी होती,लेकिन रेशमा तो जैसेमरना-जीना दोनों भूल चुकी थी।“आपा…”साजिया ने धीमे से आवाज़ लगाई।“श्श्श…”रेशमा फुसफुसाई,“मेरा बेटा सो रहा है…थोड़ी देर बाद आना…”साजिया की