कालू की पहाड़ी - 12

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बुजुर्ग की आंखों से बहते आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने अपनी फटी हुई आवाज़ में उस धोखे की परतें खोलनी शुरू कीं, जिसे सुनकर कार्तिक का कलेजा कांप उठा।प्यार का मायाजाल और मीना का दोहरा चेहराबुजुर्ग ने बताया, "बेटा, शुरुआत में सब कुछ किसी सपने जैसा था। कल्याण सिंह (कालू) अपनी सादगी और मेहनत से जो भी कमाता, वह मीना के कदमों में लाकर रख देता।दोनों का मिलना-जुलना इतना बढ़ गया था कि पूरा गाँव उनकी मिसालें देने लगा था। कल्याण सिंह उसे अपने घर ले जाता, अपनी बूढ़ी माँ से मिलवाता। उसकी माँ ने तो