अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 16

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**भाग सोलह: अजनबी राहें और वो अनजान आँखें**वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता, चाहे दिल में कितनी ही गहरी चोट क्यों न लगी हो। देखते ही देखते छह महीने गुज़र चुके थे। इन छह महीनों में मौसम बदले, कॉलेज के सेमेस्टर बदले, और बदल गईं उन दो दिलों की ज़िदंगियां जो कभी एक-दूसरे के बिना सांस लेने से भी डरती थीं। हवेली के उस बंद कमरे का तूफ़ान अब शांत हो चुका था। पल्लवी शारीरिक रूप से बिल्कुल ठीक हो गई थी। उसने कॉलेज जाना फिर से शुरू कर दिया था, वह हंसती थी, दोस्तों से बातें करती थी, लेकिन