अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 15

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**भाग पंद्रह: मासूम दिल की ज़िद और आँसुओं की विदाई**अगली सुबह जब हवेली के ऊँचे कमरों में सूरज की पहली किरण पहुँची, तो वह पल्लवी के जीवन में कोई रोशनी नहीं ला सकी। इंजेक्शन के असर से जब उसकी भारी पलकें धीरे-धीरे खुलीं, तो कमरे की दीवारें उसे किसी जेल की तरह चुभने लगीं। उसने अपनी सूजी हुई आँखों से अपने बिल्कुल बगल में बैठी माँ सुमन को देखा, जो रात भर जागने के कारण बेहद थकी हुई लग रही थीं।"मॉम..." पल्लवी की आवाज़ में अब रोने की ताकत भी नहीं बची थी, सिर्फ एक गहरा खालीपन था।"बेटा! तू उठ