अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 12

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**भाग बारह: आंसुओं का सैलाब और टूटी उम्मीद**हवेली के उस आलीशान कमरे में छाई वह खौफनाक, अजीब सी खामोशी आख़िरकार टूट ही गई। दीवार के उस सूने कोने को एकटक घूरती पल्लवी की आँखों में अचानक जैसे चेतना लौट आई। कबीर के जाने का वह कड़वा एहसास और दिल के पूरी तरह टूटने का दर्द अब उसके पूरे वजूद पर हावी हो चुका था।"मॉम..." पल्लवी के सूखे होठों से एक बहुत ही बेजान और दर्दभरी चीख निकली।अगले ही पल, पल्लवी बिस्तर से लगभग घिसटती हुई आगे बढ़ी और सामने बैठी अपनी माँ सुमन के गले से जाकर बुरी तरह चिपक