अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 11

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**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**कमरे की वह भारी खामोशी अब पल्लवी की सिसकियों में टूट रही थी। उसने अपना हाथ कबीर की पहुँच से दूर खींच लिया था और अपनी सूजी हुई, लाल आँखों से उसे घूर रही थी।"मैं नहीं आउंगी नीचे," पल्लवी ने किसी ज़िद्दी बच्ची की तरह अपना सिर हिलाया। उसकी आवाज़ अभी भी कांप रही थी।कबीर ने एक गहरी, थकी हुई सांस छोड़ी। उसने अपनी कमर पर दोनों हाथ रखे और पल्लवी को घूरते हुए पूछा, "और क्यों नहीं जाएगी तू नीचे? नीचे तेरे माँ-बाप की जान सूख रही है तेरी फिक्र में, और तुझे यहाँ ज़िद