अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 10

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**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**"कबीर... हाँ या ना?" पल्लवी की आवाज़ में अपनी आख़िरी उम्मीद को बचाने की एक आखरी तड़प थी। उसकी आँखें कबीर के चेहरे पर जमे उस कटे हुए होंठ के खून को देख रही थीं।कबीर ने अपनी आँखें बंद कीं। बंद आँखों के पीछे उसे नीचे खड़े राजेश के वो तीन थप्पड़ और उनकी वो खौफनाक धमकी सुनाई दी— *'मैं तुझे इसी हवेली के फर्श के नीचे ज़िंदा दफना दूंगा।'* कबीर डरता नहीं था, ना अपनी जान से और ना राजेश की दौलत से। लेकिन वह इस 'छोटे दिमाग वाली' लड़की के उस मासूम भविष्य से