अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 7

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**भाग सात: हवेली की चौखट पर**दरवाज़े पर पड़ने वाली वो ज़ोरदार दस्तक और पल्लवी के माता-पिता की वो घबराई हुई आवाज़ें अब पल्लवी के कानों तक नहीं पहुँच रही थीं। वह कमरे के फर्श से उठी और किसी बेजान मशीन की तरह घिसटते हुए अपने मखमल के बिस्तर तक पहुँची। उसने अपने भीगे हुए कपड़े नहीं बदले, न ही अपने बालों को सुलझाया। वह बस उसी हालत में बिस्तर पर गिर पड़ी। उसकी आँखें छत पर टंगे उस कीमती झूमर को घूर रही थीं, लेकिन उसे वहां सिर्फ कबीर की वह सर्द आँखें और उसके वे चुभते हुए लफ़्ज़ नज़र