आधुनिकता ने निगले रिश्ते

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सामाजिक लेख त्यौहार और रिश्ते: आधुनिकता की भेंट चढ़ते मूल्य सोशल मीडिया पर बढ़ते "आभासी परिवार", घर में बढ़ता अकेलापनलेखिका: डॉ वंदना शर्मा नई दिल्लीत्यौहारों का रंग धीरे-धीरे फीका पड़ता जा रहा है। तीज, राखी जैसे पर्व अब केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कभी सोचा है ऐसा क्यों हो रहा है? हमारी सामाजिक व्यवस्था चरमरा गई है। लोग फेसबुक पर हजारों-लाखों का "आभासी परिवार" बना लेते हैं, लेकिन मोबाइल हटाकर देखो तो हकीकत में चारों ओर सन्नाटा है। हम बिल्कुल अकेले हो गए हैं। लोगो की बेरुखी ने इतना तोड़ दिया कि समाज अब मात्र शब्द रह गया है। सत्य के धरातल