सुनसान सड़क पर काली एसयूवी तेज़ रफ्तार से दौड़ी चली जा रही थी। रात पूरी तरह उतर चुकी थी। सड़क के दोनों ओर फैले घने पेड़ हेडलाइट की रोशनी में कुछ पल के लिए चमकते और फिर अंधेरे में गुम हो जाते।गाड़ी के अंदर असामान्य खामोशी पसरी हुई थी।कुछ देर पहले हुई भिड़ंत के निशान दोनों के शरीर पर साफ दिखाई दे रहे थे। देव के माथे के पास हल्की-सी खरोंच थी, जिससे सूखता हुआ खून अभी भी दिखाई दे रहा था। उसकी दाईं बाँह पर भी लोहे की रॉड का वार पड़ा था, जिसकी वजह से कपड़ा फट चुका