"गुनाह करना , गुनाह सहना और गुनाह होते देखना ये भी एक अपराध ही है।"अब तक दृष्टि ने पढ़ना तो शुरू ही किया था कि उसके पिता को थोड़ा सा शक होने लगा की ये दृष्टि पुरे दिन घर पर तो होती ही नहीं।बहुत दिनों तक ऐसा चलता रहा फिर उन्होंने एक बार याद करके पुछ ही लिया कि " ये तेरी बेटी घर पे दिखाई क्यों नहीं देती । कुछ कांड तो नहीं कर रही ना । पर उन्होंने अपनी बच्ची के भविष्य के लिए या तो बात टाल देती या तो झुठ बोल देती । ऐसे कुछ दिन तो