MTNL की घंटी - 30

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दिल्ली से देहरादून का सफ़र मानो किसी फ़िल्म का धीमा-सा खूबसूरत गीत बन गया था।रास्ते भर परी अपने छोटे हाथों से गिटार की तारें छेड़ती रही—कभी सुर सही लगते, कभी उलझ जाते,लेकिन उन अधूरे सुरों में भी एक मीठा सा सुकून था।आलोक मुस्कुराकर बोला,"परी, यह गिटार तो देव का है… और यह मेरे बेटे प्रकाश का भी favourite था।"थोड़ी देर ठहरकर उसने जोड़ दिया,"वो MBBS  पढ़ाई के लिए  London  गया है, पर जल्दी ही वापिस लौट आएगा अपनी पढ़ाई पूरी करके।सुधा ने मुस्कुराकर कहा,"प्रकाश को देव से इतना लगाव है कि वो हमारे साथ कम, देहरादून ज़्यादा रहता है।कहता है—देव से बातें