MTNL की घंटी द्वारा  kalpita in Hindi Novels
नवंबर की हल्की ठंड...और मीठी-सी धूप में...आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी।तभी अंदर से...
MTNL की घंटी द्वारा  kalpita in Hindi Novels
14 नवंबर की सुबह थी।घर में रौनक थी... चहल-पहल थी... और एक खास चमक — जैसे सच में लक्ष्मी जी इस घर में पधार चुकी हों।महक आ...
MTNL की घंटी द्वारा  kalpita in Hindi Novels
अगले कुछ दिनों तक महक ने खुद को रोज़मर्रा के कामों में उलझाए रखा।पर जितनी कोशिश करती, उतनी ही उस अनजानी आवाज़ की परछाईं...
MTNL की घंटी द्वारा  kalpita in Hindi Novels
प्लीज़… बस आप एक काम कर दीजिए… कान्हा के कान पर रिसीवर रख दीजिए… आप सुन रहे हैं ना?”महक लगभग चीख पड़ी थी। उसकी आवाज़ में...
MTNL की घंटी द्वारा  kalpita in Hindi Novels
उस रात के बाद…उस रात के बाद पहली बार देव को चैन की नींद आई।कान्हा भी बिना किसी दौरे के गहरी नींद में सोया रहा।देव हर थोड...