हवेली की सुबह आज कुछ अलग ही रंग लिए हुए थी।सूरज की सुनहरी किरणें जब सफेद संगमरमर के फर्श पर पड़ रही थीं, तो ऐसा लग रहा था मानो पूरी हवेली किसी उत्सव की तैयारी कर रही हो। अवनि ने सुबह जल्दी उठकर स्नान किया और कान्हा को भोग लगाकर रसोई में जुट गई। उसने बड़े चाव से गरमा-गरम कचौड़ियाँ और केसरिया जलेबियाँ तैयार की थीं।नाश्ते की मेज़ और शाही ठाट-बाटहवेली के डाइनिंग हॉल का दृश्य किसी राजसी दरबार से कम नहीं था। मेज़ पर बिछी रेशमी चादर और उस पर सजे शुद्ध सोने और चांदी के बर्तन अपनी चमक बिखेर