सास ने अपनी सूखी, कठोर आँखें उठाकरसीधे साजिया की तरफ देखा।कमरे की हवा अचानक और भारी हो गई।“अगर रेशमा को इस घर में रहना है…”वह धीमी मगर पत्थर जैसी आवाज़ में बोली,“तो हमारे बेटे का निकाहतुम्हारी छोटी बेटी साजिया से होगा।”साजिया का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।“वंश तो बढ़ाना ही पड़ेगा,”सास ने बिना रुके कहा,“घर का चिराग चाहिए हमें।रेशमा नहीं दे सकती…तो उसकी बहन देगी।”रेशमा के अब्बू अवाक खड़े रह गए।सौतेली माँ ने घबराकर साजिया का हाथ पकड़ लिया।“और अगर यह मंजूर नहीं…”सास ने दरवाज़े की तरफ इशारा किया,“तो अभी इसी वक्त सब इस घर से निकल जाओ।हमारा बेटा अपनी