सुबह की पहली किरणें NGO मे खिड़की से झाँक रही थीं।रसोई से आती खुशबू पूरे घर में फैल रही थी—महक ने नाश्ते में पूड़ी, आलू की सब्ज़ी, पराठे, बेसन का चिल्ला, और गरमा-गरम चाय सब कुछ तैयार कर दिया था।बच्चे भी आज जल्दी उठ गए, क्योंकि वह देव के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे।हँसी-ठिठोली के बीच आलोक और सुधा भी आ पहुँचे।"अरे वाह, महक… इतने सारे पकवान! लगता है आज हम पेट पकड़कर ही उठेंगे," सुधा ने मुस्कुराते हुए कहा। "वाह देवर जी आज तो आप जी भर कर खायेंगे आज तो परहेज नही करेंगे" सुधा ने छेड़ते