नेट नहीं तो कुछ नहीं

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सोहन आज सुबह से परेशान था। बार-बार अपना मोबाइल चेक कर रहा था। शायद कुछ जरूरी मेल आने वाला था। दो दिन से हल्की बारिश हो रही थी। खराब सिग्नल आ रहे थे, नेट काम नहीं कर रहा था। ऑफिस में एक प्रोजेक्ट जमा किया था। उसका परिणाम मेल पर आना था। बार-बार अपना फोन चेक कर रहा था। पर कोई मेल नहीं दिखाई दिया। उसे झुंझलाहट होने लगी। वो सिर पकड़कर चिल्लाने लगा - "क्या हो गया इस नेट को, चल क्यों नहीं रहा। इतनी देर से बफरिंग हो रही है। सिम भी दोबारा निकालकर डाल दिया। इतना जरूरी