एक कहानी दर्द भरी

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बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था एक छोटा सा परिवार शहर में गोला बारूद से बचने के लिए अपने आप को बचते बचाते गांव में छुपने के लिए आए थे वे वही बसना टिक समझा ।दो सालों के बीच में वे लोग वहां इस तरह गुल मिल गए थे। जैसे की वे वही के रहने वाले निवासी । कुछ दिनों बाद वही एक परिवार उस गांव में निवास करने के लिए आए। उनके स्वभाव से भी प्रतिष्ठित परिवार के लग रहे थे। शायद युद्ध की वजह से वे