कालू की पहाड़ी - 11

  • 1.2k
  • 474

कार्तिक ने अपने झोले से भगवान शंकर की वह पवित्र भस्म निकाली जो थोड़ी सी बची थी।उसने उस भस्म को अपने हाथ में लिया और आँखें बंद कर 'अघोर मंत्र' का जाप शुरू किया। उसने वह भस्म हवा में उन गिरे हुए पेड़ों की ओर उछाली।जैसे ही भस्म का एक कण उन लकड़ियों से टकराया, वे पेड़ जो कालू की काली शक्ति से जुड़े थे, धीरे-धीरे सुलगने लगे।उनमें से आग की लपटें नहीं, बल्कि सफ़ेद धुआँ निकलने लगा। कार्तिक ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उस दीवार को धक्का दिया।उधर पहाड़ी पर, रूही ने महसूस किया कि कार्तिक भारी संकट में