वरदान - 11

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वह दरबार में पहुँचा।इतने बड़े महल और भव्य दरबार को उसने पहले कभी नहीं देखा था।चारों ओर मंत्री, सेनापति और दरबारी खड़े थे।जैसे ही उसकी नज़र दरबार के बीच खड़े अपने मित्र पर पड़ी, उसका हृदय धक से रह गया।जौहरी का बेटा सैनिकों से घिरा हुआ था।उसके चेहरे पर भय साफ दिखाई दे रहा था।वह सिर झुकाए खड़ा था।उसे देखते ही वरदान सब कुछ समझ गया।उसे समझते देर न लगी कि उसके मित्र ने सत्य बता दिया है और मणियों का रहस्य अब दरबार तक पहुँच चुका है।लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि वरदान के चेहरे पर न भय