किघकन्या - 3

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अमावस की घनघोर काली अॅंधेरी रात थी, रोहिणी ने इस रात को चुना हवेली से भागने के लिए ... उस रात उसने वही दुल्हन का लाल जोड़ा पहना जिसे पहनकर वो ससुराल आई थी। वो दबे पाँव हवेली से निकल ग‌ई लेकिन ज्यादा दूर तक नहीं जा पाई। इसे रोहिणी का  दुर्भाग्य ही कहेंगे कि उस रात बड़ी ही तेज हवाएँ चल रहीं थीं जिसके कारण छज्जे में लटका लालटेन झनाक से जोर की आवाज करता हुआ टूट गया और वीर सिंह की नींद खुल गई। उसने शुरू में ध्यान नहीं दिया पर जल्दी ही  उसे अहसास हो गया कि