सिद्धिका का क्रोध देखकर सारे राक्षस भय से काँप उठे।उनमें से एक चीखा—भागो! सिद्धिका पूरी शक्ति के साथ लौट आई है!अगले ही पल सारे राक्षस अपनी जान बचाकर जंगल के अंधेरे में गायब हो गए। लेकिन उसी समय...सिद्धिदात्री, जिसे राक्षस पकड़कर हवा में ले जा रहे थे, उनका हाथ छूटते ही नीचे गिरने लगी।राक्षस चीख पड़ा -आआआह!सिद्धिदात्री डर के मारे चीख उठी। उसे लगा कि अब वह सीधी चट्टानों पर गिरेगी। पर तभी...एक लाल-सुनहरी चमक बिजली की तरह उसकी ओर बढ़ी। और अगले ही क्षण वह खुद को किसी की मजबूत बाहों में सुरक्षित महसूस करने लगी। उसने धीरे-धीरे आँखें