अमृत वाणी - संत वाणी - 39

“प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥” गहरे अर्थ की व्याख्या (भाषाई गहराई के साथ)यह पंक्ति भगवान श्रीराम के समक्ष स्वयं समुद्र देव ने अपनी जड़ता (अज्ञानता) को स्वीकार करते हुए कही है। ऊपरी तौर पर देखने पर ऐसा भ्रम होता है कि इसमें महिलाओं और समाज के एक वर्ग का अपमान किया गया है, परंतु सत्य इसके ठीक विपरीत है।इस चौपाई को समझने की सबसे बड़ी कुंजी अवधी भाषा का शब्द ‘ताड़ना’ है। आधुनिक हिंदी में ‘ताड़ना’ का अर्थ किसी को घूरना या प्रताड़ित करना मान लिया गया है,