अमृत वाणी - संत वाणी - 33

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गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव के परम सिद्ध, त्यागी और साक्षात् अन्नपूर्णा के परम भक्त संत जलाराम बापा की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रसिद्ध अमृत वाणी यहाँ दी गई है। यह वाणी जीवन में केवल धन इकट्ठा करने की होड़ को छोड़कर, भूखे को अन्न खिलाने और निस्वार्थ सेवा करने का असली आध्यात्मिक रहस्य सिखाती है।संत जलाराम बापा की यह वाणी किसी भी प्रकार के कंजूसी और संचय के अहंकार को तोड़कर, परोपकार के सच्चे मार्ग पर चलना सिखाती है।“देने को टुकड़ा भला, लेने को हरि नाम।जलाराम इस संसार में, यही तुम्हारा काम।।”संत जलाराम बापा कहते हैं कि