अमृत वाणी - संत वाणी - 25

संत गुरु नानक देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के अन्याय और लालच को छोड़कर अपनी ईमानदारी की मेहनत से जीवन जीने का सच्चा मार्ग सिखाती है।“हक पराया नानका, उस सूअर उस गाय।गुरु पीर हामा ता भरे, जा मुरदार न खाय।।”(अर्थ : गुरु नानक जी कहते हैं कि किसी दूसरे के हक की कमाई को छीनना, धोखा देना या किसी की मजबूरी का गलत फायदा उठाना मुसलमान के लिए सूअर का मांस खाने के समान और हिंदू के लिए गाय का मांस खाने के समान घोर पाप है। आपके गुरु, पीर या पैगंबर ईश्वर के दरबार में आपकी