हम अक्सर किसी व्यक्ति के बाहरी ठाट-बाट, महंगे कपड़ों, सोने के गहनों या उसकी मीठी-मीठी चिकनी बातों को देखकर उसे बहुत महान और अच्छा इंसान मान लेते हैं। लेकिन कई बार उस चमक-दमक के पीछे एक बहुत ही कड़वा, कपटी और स्वार्थी स्वभाव छिपा होता है। इसके विपरीत, एक सच्चा और ईमानदार इंसान बाहर से बहुत सीधा और साधारण दिख सकता है। इस इंसानी स्वभाव के अंतर को संत वेमना ने प्रकृति के अद्भुत उदाहरण से समझाया है:“सोना टूटे तो जुड़े, सौ बार जुड़े सहर्ष।कनककुंभ सौ कनक के, माटी घट एक कर्ष॥” ( यानी: सोना सौ बार भी टूटे तो अपनी