अध्याय १: बिजली, बादल और भूली हुई प्रार्थनाआसमान उस रात फटने को था। रामटोला के ऊपर बादल इस तरह घुमड़ रहे थे जैसे किसी ने आकाश में कोई पुराना घाव कुरेद दिया हो, और उस घाव से अंधेरा रिसकर पूरे गाँव पर बरस रहा हो। बिजली हर कुछ पलों में कड़कती, और उसकी रोशनी में गाँव की मिट्टी की दीवारें, टूटी हुई मुंडेरें और झुके हुए पेड़ किसी डरावने चित्र की तरह चमक उठते। नदी किनारे का बाँध, जिसे कालीचरण सिंह के ठेके में बनवाया जा रहा था, उस रात पानी के दबाव से चरमरा रहा था, और गाँव के