दिल्ली की सर्दी में कमरे की गरमाहट और गाजर के हलवे की खुशबू जैसे किसी को बचपन की मीठी यादों में ले जाए।महक ने एप्रन उतारते हुए जल्दी-जल्दी हाथ धोए और दरवाज़े की ओर भागी।नीचे से ताया जी की आवाज आई —"महक, देखो तुमसे मिलने कौन आया है!"महक की धड़कन अनजाने से उत्साह में तेज़ हो गई।जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, सामने आलोक और सुधा जी खड़े थे।सर्द हवा में भी सुधा जी की आँखों में अपनापन और गर्मजोशी थी।महक को देखते ही उन्होंने उसे कसकर गले से लगा लिया,मानो बरसों का कोई इंतज़ार आज पूरा हो गया हो। महक